शेयर मार्केट में बोलने वाले बेसिक शब्द क्या होते हैं?

शेयर बाजार में अभी-अभी प्रवेश लिया है तो इन रोज बोलने वाले बेसिक शब्द का मतलब जानना बहुत आवश्यक है। इस ब्लॉग के अंतर्गत हम समझेंगे की शेयर मार्केट में रोज बोलने वाले शब्द क्या होते हैं।  शब्द आपको अच्छे से समझ में आएगा।जो निम्नलिखित है।

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IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफर)

जब गैर सूचीबद्ध कंपनी(अनलिस्टेड कंपनी) नए SHARE जारी करने के लिए पूंजी बाजार में प्रस्ताव लेकर आती है या ऐसी कंपनी जो अपनी सिक्योरिटीज (शेयर) पहली बार आम जनता के लिए बाजार में प्रस्तुत करती है। तो इस प्रकार के प्रस्ताव को इनिशियल पब्लिक ऑफर आईपीओ (IPO)कहते हैं। 

DIVIDENDS (डिविडेंड)

कंपनी अपने व्यापार से अर्जित लाभ पर टैक्स आदि  चुकाने के बाद कुछ हिस्सा वर्ष में एक या दो बार शेयर धारकों को उनकी भागीदारी के अनुपात में डिविडेंड के रूप में देती है यह  डिविडेंड शेयर के फेस वैल्यू पर आधारित होता है।  

BONUS SHARE (बोनस शेयर)

इसमें यह पता चलता है कि कंपनी के शेयर कैपिटल में कितना हिस्सा शेयर बेचकर अर्जित किया गया है तथा कितना हिस्सा निवेशकों को बोनस शेयर जारी करके शेयर कैपिटल में शामिल किया गया है। बोनस शेयर धारकों को मुफ्त में जारी किए जाते हैं। 

RALLY (रैली)

शेयर बाजार में गिरावट या ठहराव के दौर के बाद जब शेर की कीमतों में वृद्धि का दौर आता है तथा शेयर बाजार का सूचकांक बढ़ने लगता है। तो इस बाजार की भाषा में (रैली ) कहा जाता है। 

52 WEEKS HIGH LOW  (52 हफ्तों का हाई /लो )

किसी भी स्टॉक का भाव वर्ष साल में सबसे ऊंचाई पर जाता है। तो 52 हफ्तों का हाई (HIGH) कहलाता है। इसी तरह जब किसी स्टॉक का भाव निचले स्तर पर जाता है। तो 52 हफ्तों का लो (LOW) कहलाता है।

FACE VALUE (फेस वैल्यू )

किसी भी तरह के स्टॉक के शुरुआती कीमत के लिए फेस वैल्यू शब्द का इस्तेमाल किया जाता है।और इसकी वैल्यू कंपनी तय करती है। तथा कंपनी द्वारा निर्धारित शुरुआती मूल्य फेस वैल्यू (FACE VALUE) कहलाता है। 

TRADE (ट्रेड )

दोस्तों इस शब्द को भी आपको अच्छे से समझ लेना चाहिए क्योंकि शेयर मार्केट में बेसिक इस्तेमाल होने वाला शब्द है। और यह बाजार की दिशा पूर्ण रूप से बताता है। अगर बाजार के शेयर  नीचे गिर रहे हैं। तो बाजार में गिरावट का ट्रेंड (TRADE)है। इसी तरह यदि बाजार ना ऊपर जाए और ना ही नीचे जाए तो इसे साइडवेज़ ट्रेड कहा जाता है

STOCK MARKET CRASH (स्टॉक मार्केट क्रैश)

जब शेयर बाजार में अचानक SHARE बहुत ही कम समय में बहुत ज्यादा गिर जाते हैं। तो उस स्थिति को स्टॉक मार्केट (CRASH) कहा जाता है और इस स्थिति में स्टॉक मार्केट में मंदी के कारण शेयर बेचने  लगते हैं। 

INTRADAY POSITION (इंट्राडे पोजीशन)

इंट्राडे पोजीशन व पोजीशन है जब आप ऐसी पोजीशन बनाते हैं जिसे आप उसी दिन स्क्वायर ऑफ करना चाहते हैं तो ऐसी पोजीशन को इंट्राडे पोजीशन कहते हैं।उदाहरण के लिए मार्केट खुलने के बाद आप शेयर खरीदते हैं और मार्केट बंद होने से पहले बिक्री कर देते हैं तो उस स्थिति को इंट्राडे पोजीशन (INTRADAY POSITION) कहते हैं।

VOLUME (वॉल्यूम)

किसी शेयर  का वॉल्यूम किसी एक दिन उस शेयर में हुए खरीद और बिक्री के कुल सौदे की संख्या को वॉल्यूम (VOLUME) कहते हैं। उदाहरण के लिए जैसे किसी शेयर  की खरीद और बिक्री की कुल संख्या को वॉल्यूम  कहते हैं। वॉल्यूम और उसके शेयर  की कीमत पर इसके असर को समझना बहुत जरूरी है। 

MARKET SEGMENT (मार्केट सेगमेंट)

मार्केट के अलग-अलग सेगमेंट होते हैं। इसमें अलग तरह की सौदे होते हैं।  सेगमेंट को रिवॉर्ड और रिस्क के आधार पर अलग-अलग किया जाता है। इसमें तीन मुख्य सेगमेंट होते हैं।

1.CAPITAL MARKET (कैपिटल मार्केट)

इस सेगमेंट शेयर,प्रेफरेंस शेयर,वारंट और एक्सचेंज ट्रेड, फंड खरीदे बेचे जाते हैं। इस सेगमेंट को हिस्सों में बांटा जाता है शेयरों की हिस्सेदारी सेगमेंट में बेचा खरीदा जाता है। इसको EQ निशान से पहचाना जा सकता है। आप शेयरों  की कैपिटल मार्केट सेगमेंट बेचे और खरीद सकते हैं।

2.FUTURE AND OPTION (फ्यूचर और ऑप्शन)

यह डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट होते हैं। इसमें शेयर  धारकों को सहूलियत मिलती है। यह कम पूंजी के साथ कमोडिटी,स्टॉक,करेंसी,में बड़ी पोजीशन ले सकते हैं। इसमें जितना ही मुनाफा होता है। उतना ही जोखिम अधिक होता है।

3.WHOLESALE DEBT MARKET (होलसेल डेट मार्केट)

मार्केट के सेगमेंट में फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट के सौदे होते हैं। जैसे- म्युचुअल फंड,बीमा करता,वित्तीय संस्था,बैंक, प्राथमिक डीलर,आदि  सभी सरकारी प्रतिभूतियों और ब्रांडों के व्यापार में भाग लेते हैं। 

SHAREHOLDER (शेयर होल्डर)

कोई भी व्यक्ति या संस्था जिसका साधारण शेयर  या प्रेफरेंस शेयर  पर मालिकाना अधिकार होता है। वह शेयर होल्डर (SHAREHOLDER)कहलाता है। शेयर  के मालिकाना सबूत के आधार पर शेयर सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। जो आजकल कंप्यूटरीकृत होते हैं। 

VOLATILE SHARE (वोलेटाइल शेयर)

यह वे शेयर  होते हैं जिसमें बहुत ही जल्दी उतार और चढ़ाव आता है। वैलेंटाइल शेयर कहलाते हैं। यह शेयर अचानक बहुत ही बढ़ जाते हैं। और बहुत ही जल्द अचानक गिर भी जाते हैं। 

CLOSING PRICE (क्लोजिंग प्राइस)

स्टॉक एक्सचेंज में  शेयर के दैनिक कारोबार समाप्त होने पर दर्ज की गई अंतिम कीमत शेयर की (क्लोजिंग प्राइस )कहलाती है। अथवा क्लोजिंग प्राइस  उस शेयर का, उस दिन अंतिम लेनदेन दर्ज हुआ होता है। 

DELL MARKET  (डेल मार्केट)

जब शेयर के क्रय और विक्रय मूल्य में अधिक अंतर हो तो ट्रेडिंग की प्रक्रिया में मंदी आ जाती है। स्टॉक एक्सचेंज में ऐसी स्थिति को (DELL MARKET) डेल मार्केट कहां जाता है। ऐसी स्थिति में शेयर मार्केट को बड़ी-बड़ी संस्था स्थिति के अनुसार संस्थागत खरीद व बिक्री करते हैं। जिससे स्टॉक एक्सचेंज में हलचल पैदा हो और ट्रेडिंग अपनी गति पकड़ सके। 

SHARE MARKET (शेयर मार्केट)

यह मार्केट एक ऐसा बाजार है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। दूसरे बाजार की तरह भी इसमें मोल भाव होता है। इसमें खरीदारी कंप्यूटरीकृत और ऑफलाइन के माध्यम से किया जाता है। भारत में दो शेयर बाजार हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), और इसमें सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरो में मोल भाव किया जाता है।  

BULL MARKET AND BEAR MARKET (बुल मार्केट और बियर मार्केट)

जब बाजार और बाजार के शेयर  एक निश्चित समय में बहुत तेजी से ऊपर की ओर बढ़ता है तो इस अवस्था को (BULL)  मार्केट कहा जाता है।  यदि इसी तरह जब बाजार और बाजार के शेयर तेजी से नीचे की ओर आते हैं तो इस अवस्था को बियर (BEAR)मार्केट कहते हैं। 

SATTA ( सट्टा )

किसी कंपनी की शेयर की कीमत में कम समय में होने वाले उतार-चढ़ाव की संभावना को ध्यान में रखकर जब निवेशक या ‘शेयर धारक’ शेयरों की खरीद या बिक्री करता है।तो इसे स्पैक्यूलेशन अथवा सट्टा (SATTA) कहते हैं सट्टा में निवेशक कम अवधि में अधिक लाभ कमाने के लिए अधिक जोखिम उठाता है। तथा उसके द्वारा निवेश की गई पूंजी भी दांव पर लगी होती है।

SUPPORT (सपोर्ट)

जब किसी शेयर की कीमत गिरने लगती है। तो इसके खरीदार बढ़ जाते हैं तथा बेचने वाले कम हो जाते हैं। इस प्रकार शेयर  की घटती कीमतों में एक स्थिति ऐसी आती है। जब बाजार में शेयर की डिमांड ज्यादा होती है तथा इसकी सप्लाई कम, यह स्थिति उस शेयर  की कीमतों में और गिरावट आने से रोकती है। शेयर  की उस कीमत को सपोर्ट (SUPPORT) लेवल कहा जाता है। 

RESISTANCE (रेजिस्टेंस)

जब बाजार लगातार ऊपर जाता है और शेयर की कीमतें बढ़ती हैं। क्योंकि उस शेयर  की मांग अधिक होती है। शेयर  की बढ़ती हुई कीमतों में एक स्तर वह आता है। जब वह शेयर की तात्कालिक ऊंची कीमत उसकी मांग घट जाती है। तथा उसे बेचकर मुनाफा कमाने वाले निवेशक की संख्या बढ़ जाती है। यह स्थिति वह शेयर की कीमतें बढ़ने से रोकती  है। शेयर  की कीमत का यह लेवल उसका रेजिस्टेंस (RESISTANCE) लेवल कहलाता है। 

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