शेयर मार्केट एक ऐसा मार्केट है जहां कंपनियों के शेयर तथा अन्य वित्तीय साधन खरीदे बेचे जाते हैं। यहां निवेशक मोलभाव करके सौदे खरीदते और बेचते हैं। निवेशक ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक के माध्यम से शेयर खरीदते और बेचते हैं। शेयर मार्केट में कंपनियों के शेयर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से खरीद और बिक्री होती है। आज के समय में खरीद करना और बिक्री करना दोनों चीज बहुत ही आसान हैं। क्योंकि घर में बैठा व्यक्ति कंप्यूटर या लैपटॉप के माध्यम शेयर की खरीद और बिक्री कर सकता हैं।
1.शेयर मार्केट के कार्य

शेयर मार्केट कार्य के अंतर्गत स्टॉक शेयर, ब्रांड, और डेरिवेटिव,जैसी वित्तीय उपकरण की खरीद और बिक्री की जाती है। इस प्रकार शेयर बाजार का प्राथमिक कार्य व्यवसायों और निवेशकों के लिए वित्तीय बाजार की सुविधा प्रदान करना है। इसी प्रकार व्यवसाय अपनी पूंजी जुटाने और निवेशकों को अपनी विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए सार्वजनिक रूप से अपने शेयरों का व्यापार करते रहते हैं। देश की दॄष्टि से देखा जाए तो बचत के निवेशकों को बढ़ावा देने और देश के विकास को गति देने के लिए शेयर बाजार या शेयर मार्केट बहुत ही आवश्यक है।
2.शेयर मार्केट कितने प्रकार का होता है
विभिन्न प्रकार के शेयरों की अलग-अलग विशेषताएं होती है।अतः उनके प्रकार को समझना बहुत ही आवश्यक है ताकि निवेशक अपनी जरूरत तथा विवेक के अनुसार उनका चयन कर सके। भारत में निवेशकों का मुख्यता दो प्रकार के शेयर विकल्प उपलब्ध है।
i.इक्विटी शेयर
ii.प्रिफरेंस शेयर
i.इक्विटी शेयर क्या है
प्राइमरी तथा सेकेंडरी मार्केट से निवेशक जो शेयर हासिल करता है। वह ‘साधारण शेयर’ कहलाता है। यह शेयर धारक कंपनी के आंशिक हिस्सेदारी होते है। और नफा नुकसान से जुड़े रहते है। और इनका संख्या के अनुपात में कंपनी पर मालिकाना हक होता है। और कंपनी की नीति बनाने वाली जनरल मीटिंग में वोट देने का अधिकार होता है। यदि कंपनी अपना व्यवसाय पूर्ण रूप से समाप्त करती है। तो कंपनी सारे खर्च देने के बाद बची पूंजी या संपत्ति को या धन को इक्विटी शेयर धारकों को उनके शेयर संख्या के अनुपात में देती है।
ii.प्रेफरेंस शेयर क्या होता है
इक्विटी शेयर ‘साधारण शेयर’ के विपरीत कंपनी चुनिंदा निवेशकों,दोस्ताना निवेशकों,तथा प्रमोटर्स,नीतिगत रूप से प्रेफरेंस शेयर जारी करती है। इन शेयरों की कीमत साधारण कीमत से अलग होती है। तथा प्रेफरेंस शेयरधारकों को वोट देने का अधिकार नहीं होता है। प्रेफरेंस शेयर धारक को हर वर्ष निश्चित लाभ मिलता है। और इक्विटी शेरधारक की अपेक्षा अधिक सुरक्षित होते है। कंपनी अपनी नीति के अनुसार प्रेफरेंस शेयर को पूर्ण या आंशिक रूप से साधारण शेयर में परिवर्तित कर सकती है। प्रेफरेंस शेयर धारक को लाभ में सबसे पहले हिस्सा मिलता है। लेकिन कंपनी के हिस्सेदार नहीं होते है। लाभ के आधार पर प्रिफरेंस शेयर मुख्यता तीन प्रकार के होते है। जो निम्नलिखित है।
नॉन क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर (असंचयी अधिमानित शेयर )
यदि कंपनी किसी कारण वश पहले साल लाभ नहीं कमाती है। और इसकी जगह दूसरे साल में लाभ कमाती है। तो इस स्थिति में निवेशक दोनों साल में लाभ कमाने के दवा नहीं कर सकता है।
क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर(संचयी अधिमानित शेयर)
यदि कंपनी किसी वजह से पहले साल लाभ नहीं कमाती है। और दूसरे साल लाभ की स्थिति में आती है। तो निवेशक दोनों साल लाभ प्राप्त करने का दावा कर सकता है।
रिडीज्ड़ क्युमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर(विमोचनशील अधिमानित शेयर)
इस तरह के शेयरधारक को धन निश्चित समय के बाद लाभांश (डिविडेंड) के साथ लौटा दिया जाता है है। इस प्रकार के शेयर धारक का जुड़ाव बहुत कम समय के लिए होता है। और कंपनी की इच्छा पर निर्भर करता है।
3.कंपनी के शेयर सूचीबद्ध क्यों होते हैं।
एक सूचीबद्ध कंपनी (company) स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से जनता को शेयर जारी करती है। सूचीबद्ध कंपनियों को अपने शेयर धारकों को तिमाही वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। एक बार शेयर जारी होने के बाद कंपनी के बकाया शेयरों को एक्सचेंज के माध्यम से बेचा भी जाता है और खरीदा भी जाता है। कंपनी सूचीबद्ध होने के लिए किसी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में से किसी एक द्वारा निर्धारित योग्यता पूरी करनी होती है। जब कोई कंपनी सूचीबद्ध हो जाती है। तो उसे उन योग्यताओं को जारी रखना होता है। यदि ऐसा न करने पर कंपनी डिलिस्ट हो जाती है। तथा सूचीबद्ध कंपनी सार्वजनिक कंपनी होती है।
4.सेबी क्या है

शेयर मार्केट में बोलने वाले बेसिक शब्द क्या होते हैं?
अगर आप ने शेयर बाजार में निवेश किया है। तो आपने सेबी के बारे में जरूर सुना होगा। तो हम आसान भाषा में समझते हैं कि सेबी क्या है। सरल शब्दों में कहें तो पूंजी बाजार नियामक है।
पूंजी बाजार में सभी लेन देन को सेबी या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के नियमों के अनुसार पुष्टि करने की आवश्यकता होती है। सेबी का मुख्य उद्देश्य यह है प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों की रक्षा करना और प्रतिभूति बाजार के विकास को बढ़ावा देना तथा संबंधित अनुसांगिक मामलों को विनियमित करना है। तथा पूंजी बाजार में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना है।
5.सेबी के कार्य
सेबी के महत्वपूर्ण कार्य में सबसे पहले निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। और सेबी के विकास कार्य में एक मध्यस्थों या (दलालों और उप दलालों) को प्रशिक्षण प्रदान करना तथा निवेशकों को शिक्षित करना और भारतीय बाजार के बारे में जागरूक करना आदि शामिल है।
6.शेयर मार्केट में जोखिम क्या है
शेयर बाजार में निवेशक उच्च जोखिम वाले तथा उच्च रिटर्न वाले निवेश रहे हैं। ऐसा इसलिए होता रहता है क्योंकि जब व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ते रहते हैं तो कंपनियों के आम स्टॉक तथा शेयर भी बढ़ते रहते हैं। कुछ नकारात्मक कारक भी होते हैं जो व्यवसाय को प्रभावित करते हैं। अक्षम प्रबंधन,अप्रत्याशित प्रतिस्पर्धा,होते हैं। तथा कुछ देश में भी आर्थिक कारक होते हैं। जैसे- मंदी,व्यापार युद्ध का होना,आदि शामिल है। जो व्यापार के प्रति नकारात्मक प्रभाव डालते रहते हैं। इस प्रकार कोई निवेशक अपनी संपत्ति या पूंजी खो देता है। तथा अन्य निवेशकों की तुलना में अधिक लाभ व हानि उठाते हैं।
7.किसी कंपनी के शेयर कैसे खरीदें

किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट का होना बहुत आवश्यक है। इन डॉक्यूमेंट के उपलब्ध न होने पर आप शेयर बाजार में किसी भी कंपनी का शेयर नहीं खरीद सकते और ना ही उसमें किसी प्रकार का ट्रांजैक्शन कर सकते है। आइये दोस्तों हम जानते हैं कि किसी कंपनी का शेर खरीदने के लिए हमें क्या-क्या प्रक्रिया करनी पड़ती हैं।
i.जमा खाता का होना (SAVING ACCOUNT)
किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने के लिए एक खाता का होना बहुत आवश्यक हैं। दोस्तों आप किसी भी बैंक में डॉक्यूमेंट के माध्यम से किसी अच्छे बैंक में खाता खुलवा सकते हैं। क्योंकि विभिन्न फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए एक खाता का होना बहुत ही आवश्यक है।
ii.डीमैट खाता (DEMAT ACCOUNT)
जब आप शेयर की खरीदारी और बिक्री करते हैं तो यह प्रक्रिया डिमैट अकाउंट के बिना नहीं की जा सकती। क्योंकि डिमैट अकाउंट के माध्यम से किसी कंपनी के शेयर इसी डिमैट अकाउंट में रखे जाते हैं और इसमें किसी फिजिकल डॉक्यूमेंट की आवश्यकता नहीं होती है। यदि किसी प्रकार से कोई गड़बड़ी या त्रुटि होती है। तो इसी के माध्यम से आप अपना प्रूफ दे सकते हैं। और किसी प्रकार की ट्रेडिंग करने के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित है।
iii.ट्रेडिंग अकाउंट (TRADING ACCOUNT)
जब आपके पास एक डीमैट अकाउंट (DEMAT ACCOUNT) खुल जाता है तो आपको स्टॉक मार्केट में शेयर खरीदने और बेचने के लिए एक ट्रेडिंग अकाउंट की आवश्यकता होती है। ट्रेडिंग अकाउंट आपके डिमैट अकाउंट और स्टॉक एक्सचेंज के बीच जुड़ाव के रूप में कार्य कर्ता है। शेयर खरीदने के लिए किसी ब्रोकर से डिमैट अकाउंट खुलवाना होगा तथा डिमैट अकाउंट को बैंक अकाउंट से जोड़ना होगा। इसके बाद आप शयरों का लेनदेन तथा खरीद बिक्री कर सकते हैं।
8.शेयर मार्केट में निवेश के लिए शुरुआती सुझाव क्या है
शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए बहुत ही धैर्य तो रखना ही पड़ेगा। इसके साथ-साथ अनुशासन की भी बहुत आवश्यकता है। इसके बिना आप शेयर मार्केट में सफलता नहीं पा सकते। तो लिए दोस्तों हम जानते हैं की शेयर मार्केट में निवेश के लिए शुरुआती सुझाव क्या-क्या है।
i.उद्देश्य निश्चित करें-
शेयर मार्केट में सबसे पहले सुझाव यह है की आप गलत संगत से बचें। तथा जल्दी धन कमाने के धारणा से आपको बचना चाहिए। क्योंकि यह लालच बहुत बुरी बला है। आप अपने जीवन की जमा पूंजी गंवा सकते हैं। शेयर की उच्च जोखिम,उच्च रिटर्न प्रकृति को पहचाने। यदि आप नियमित लाभ की उम्मीद कर रहे हैं तो प्रतीक्षा करने के लिए सदैव तैयार रहें। इसमें कई वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।
ii.किसी टिप्स पर निर्भर ना रहे-
किसी दूसरे व्यक्ति से मिलने वाली सलाह या मशवरा से दूरी बनाकर रखें। चाहे वह दोस्त सगा संबंधी क्यों ना हो जब तक आपके पास स्टॉक का फंडामेंटल और एनालिसिस की पूर्ण जानकारी ना हो तब तक आप किसी के टिप्स पर आधारित ना रहे।
iii.सफलता की कहानियों से दूर रहें-
रातों-रात अमीर बनने की कहानियों से सदैव दूर रहे। क्योंकि शेयर मार्केट में ऐसी कोई टिप्स नहीं जो आपको रातों-रात अमीर बना दे। और स्पॉन्सर करने वाली वीडियो से भी दूरी बनाकर रखें। तथा उसकी गहन अध्ययन करें तब उसे पर विश्वासकर सकते हैं।
नमस्कार! मैं इस ब्लॉग साइट का लेखक हूं, मेरे पास शेयर बाजार में कई वर्षों का अनुभव है और मैं लगातार बाजार की चाल, कंपनियों के फंडामेंटल्स और ट्रेंड्स पर नजर रखता हूं। मेरा लक्ष्य है, हर आम निवेशक तक शेयर बाजार की सटीक, सरल और सही जानकारी पहुंच सके।