डिमैट खाता में जबरदस्त उछाल, महिलाएं भी ले रही है शेयर मार्केट में हिस्सा जाने डिटेल्स l  

भारत में निवेश की दुनिया में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अब केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी तेजी से शेयर मार्केट की ओर रुख कर रही हैं। डिमैट खातों की संख्या में जबरदस्त उछाल इसका स्पष्ट प्रमाण है। 

भारत की वित्तीय प्रणाली डिजिटल हो रही है, और इसके साथ ही महिलाएं भी आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

 डिमैट खाता क्या होता है 

डिमैट खाता वह खाता होता है जिसमें आपके शेयर, म्यूचुअल फंड्स, बॉन्ड्स आदि इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रहते हैं। जैसे बैंक में पैसे रखे जाते हैं, वैसे ही डिमैट खाते में शेयर रखे जाते हैं।

इस खाते की मदद से निवेशक बिना पेपर शेयर के ऑनलाइन ही शेयर खरीद और बेच सकते हैं।

डिमैट खातों में तेजी का कारण 

डिमैट खातों की संख्या में बढ़ोत्तरी के कई सारे कारण हैं जो निम्नलिखित है l तो आइये दोस्तों इसको भी हम समझते है l 

  1. डिजिटलीकरण का प्रसार: अब हर चीज़ ऑनलाइन हो गई है चाहे वह बैंकिंग हो, शॉपिंग हो या फिर निवेश। शेयर बाजार में निवेश करने के लिए अब किसी ब्रोकरेज हाउस में लाइन लगाने की जरूरत नहीं। मोबाइल ऐप से ही खाता खुल रहा है।
  1. महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि: पहले महिलाओं को केवल घरेलू कामों तक सीमित समझा जाता था। लेकिन अब महिलाएं भी वित्तीय निर्णयों में भाग लेने लगी हैं। डिमैट खाता खुलवाकर वे स्वतंत्र रूप से निवेश कर रही हैं।
  1. स्टॉक मार्केट में आकर्षक रिटर्न: पिछले कुछ वर्षों में खासतौर सन 2020 से लॅाकडाउन लगा है लोगों का शेयर मार्केट की तरफ रुझान बढ़ा है l शेयर बाजार से अच्छा रिटर्न मिलने की वजह से लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।

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महिलाओं द्वारा डिमैट खाता खुलवाने में उछाल

पिछले कुछ सालों में डिमैट खातों की संख्या में बहुत तेजी देखने को मिली है l आकड़ो के अनुसार मार्च 2021 साल के अंत मे कुल खाते सिर्फ 3.33 करोड़ थे, वही दिसम्बर 2024 तक यह बढ़कर 14.30 करोड़ हो गए l लगभग चारगुना से भी ज्यादा इजाफा हुआ है l 

पुरुष खाता धारकों की संख्या अभी भी महिलाओं से काफी ज्यादा है लेकिन महिलाओं की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है l मार्च 2021 से दिसंबर 2024 के बीच पुरुष डीमैट खाते 2.65 करोड़ से बढ़कर 11.53 करोड़ हो गए हैं l जबकि महिलाओं के डीमैट खाते 2.7 करोड़ तक पहुंच गए हैं। 

महिलाओं की हिस्सेदारी

कुल निवेशकों में महिलाओं का हिस्सा करीब 1 में 4 यानी लगभग 25‑28 प्रतिशत के आसपास है

सीएसआर रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राज्यों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा आदि राज्यों में महिलाओं की भागीदारी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है उदाहरण स्वरूप ओडिशा, असम, राजस्थान आदि ।

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महिलाओं की दिलचस्पी बढ़ने के पीछे के कारण

  1. ऑनलाइन जानकारी और शिक्षा: आज यूट्यूब, इंस्टाग्राम, और फाइनेंस ब्लॉग्स के जरिए महिलाओं को फ्री में निवेश से जुड़ी जानकारी मिल रही है।
  1. कम निवेश से शुरुआत की सुविधा: अब SIP के जरिए ₹100 या ₹500 से भी निवेश की शुरुआत की जा सकती है, जिससे जोखिम कम रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है l 
  1. पर्सनल ग्रोथ और सेविंग गोल्स:  महिलाएं बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट प्लानिंग, और अपने सपनों के लिए निवेश कर रही हैं।

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निवेश में महिलाओं के लिए विशेष सुझाव

  1. स्टॉक्स लंबे समय के लिए निवेश करे l 
  2. फंडामेटल और टेक्निकल एनालेसिस पर ध्यान दें l 
  3. बाजार मे गिरावट के समय को खरीदारी का अवसर माने l 
  4. मार्केट के माहौल और आर्थिक परिवर्तनों पर नजर रखे l 

ध्यान दें: हमारी Website पर दी गई जानकारी केवल जानकारीपूर्ण उद्देश्यों के लिए है l निवेश से पहले अपने वित्तीय स्थित का आकलन करें और विशेषज्ञ सलाहकार से परामर्श लें l निवेश में जोखिम शामिल होते है l हम किसी भी प्रकार के वित्तीय नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं है

निष्कर्ष

डिमैट खातों में जो तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है, वह केवल तकनीकी विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि भारतीय समाज के बदलते आर्थिक दृष्टिकोण का प्रतीक है। महिलाएं अब न केवल घर संभाल रही हैं, बल्कि वित्तीय निर्णयों में भी आगे आ रही हैं।

शेयर बाजार में महिलाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत आत्मनिर्भरता और समानता की ओर अग्रसर है। यह परिवर्तन सिर्फ आर्थिक नहीं, सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

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